मजाज़ से ही तो लखनऊ में महक है.

इक नन्ही मुन्नी सी पुजारन, पतली बाहें, पतली गर्दन। भोर भये मन्दिर आयी है, आई नहीं है माँ लायी है। वक्त से पहले जाग उठी है, नींद भी आँखों में भरी है। ठोडी तक लट आयी हुई है, यूँही सी लहराई हुई है। आँखों में Read More …

मजाज़ का कलाम

‘ मजाज़’ लखनवी का मूल नाम असरारुल हक़ था।उनका जन्म यूपी के रुदौली कस्बे में 1911 में हुआ था। 5 दिसंबर (बुधवार) को उनकी पुण्यतिथि है। कुल 44 बरस जीनेवाले मजाज़ ने उर्दू शायरी में जो मकाम हासिल किया, वह बहुतों के हिस्से नहीं आया। मजाज़ की मकबूलियत Read More …