मुखातिब के सहारे लखनऊ फिर शेर ओ सुखन में परवान चढ़ेगा

कैफ़ी आज़मी को याद करते हुए मुखातिब ने महफ़िल ए मुशायरा रखा है.मुखातिब  की कन्वेनर आयशा का कहना है की हम नए लोग हैं और नए ही लोगों के साथ अपने शहर के अदब को सम्भालने बढ़ने निकले हैं.इस प्रोग्राम में कैफ़ी की ज़िदगी पर Read More …

मजाज़ से ही तो लखनऊ में महक है.

इक नन्ही मुन्नी सी पुजारन, पतली बाहें, पतली गर्दन। भोर भये मन्दिर आयी है, आई नहीं है माँ लायी है। वक्त से पहले जाग उठी है, नींद भी आँखों में भरी है। ठोडी तक लट आयी हुई है, यूँही सी लहराई हुई है। आँखों में Read More …

बिरयानी पर जान छिड़कता है लखनऊ

नॉन वेज खाने वालों के लिए बिरयानी सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला डिश है. लखनऊ ने चावल को इस जायके में लपेटा है की अच्छे अच्छे दीवाने हो जाए आवश्यक सामग्री आधा किलो चिकन दो कप बासमती चावल चार बड़े चम्मच तेल डेढ़ कप Read More …

शामी कवाब लखनऊ की पहचान

शामी कबाब की खासियत ही यही है कि आप इसे स्नैक के तौर पर खाने के साथ-साथ रुमाली रोटी के साथ भी खा सकते हैं. हालांकि इसे बनाने में कुछ वक्त तो जरूर लगता है लेकिन एक बार आपने इसका जायका चख लिया तो जिन्दगी Read More …

मजाज़ का कलाम

‘ मजाज़’ लखनवी का मूल नाम असरारुल हक़ था।उनका जन्म यूपी के रुदौली कस्बे में 1911 में हुआ था। 5 दिसंबर (बुधवार) को उनकी पुण्यतिथि है। कुल 44 बरस जीनेवाले मजाज़ ने उर्दू शायरी में जो मकाम हासिल किया, वह बहुतों के हिस्से नहीं आया। मजाज़ की मकबूलियत Read More …

बेगम हजरत महल

बेगम हज़रत महल नवाब वाजिद अली शाह की पहली बेगम थी। इन्होंने लखनऊ को अंग्रेज़ों से बचाने के लिए भरसक प्रयत्न किए और सक्रिय भूमिका निभाई। यद्यपि वे एक रानी थीं और ऐशो आराम की जिन्दगी की अभ्यस्त थीं, लेकिन अपने सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के लिए स्वयं युद्ध के मैदान में Read More …

कभी तरगारों पर बहकता था लखनऊ

गुलाबी होंट पर घुंघराले बाल, दूध से सफ़ेद गाल,इकहरा बदन,चेहरों पर बिखरी मुस्कान,आवाज़ में झंकार,बदन में लचक जिसपर अच्छे अच्छे फिसल जाए।उन्हें प्यार से लखनवी लोग तरगारे कहते।जैसे रेशमी कपड़े पर तारे टाँके हों।गुजरात से खास इन्हें लखनऊ की चौखट पर लाया जाता।इतनी खूबसूरती को Read More …